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Reservation System in India : आरक्षण देश के लिए उस दीमक की तरह है जो देखने में मासूम और शांत लगती है, लेकिन धीरे धीरे देश की नींव को खोखला कर रही है. आज के इस लेख में हम आरक्षण के बारे में बात करने वाले है की कैसे इस आरक्षण रूपी जहर की शुरुआत हुई? और आज कैसे ये नाक का नासूर बनता जा रहा है ? हर साल सैकड़ो सवर्ण वर्ग के युवाओं के सपने तोड़ने वाले इस आरक्षण का अंत क्या है? क्यों ये आरक्षण आज हमारे लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है? वो कौन लोग है जो इस अभिशाप को बचाने के लिए जी जान से लगे हुए है? क्या आरक्षण से किसी को कोई फायदा भी है? जब देश में तमाम संसाधन ही तो आरक्षण की क्या जरुरत?

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आरक्षण क्या है

और सबसे बड़ा सवाल आरक्षण हमेशा जाती के आधार पर दिया जाता है, लेकिन गरीबी कभी भी जाती देखकर तो आती नहीं है. तो इस आरक्षण को खत्म क्यों नहीं किया जा रहा है? दरअसल इसके पीछे कुछ चेहरे है जो बिलकुल उस चुगलखोर की तरह काम कर रहे है जो चोर को कहे की चोरी कर, और मालिक को जगा देता है. और खुद को मामले से अलग कर लेते है. सब के बारे में बात करेंगे लेकिन पहले जान लेते है की आखिर ये आरक्षण है क्या?

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आरक्षण व्यवस्था क्या है – Reservation System in India

Reservation System in India : आरक्षण का तात्पर्य किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ग विशेष को विशेष महत्व या आरक्षित क्षेत्र दिया जाता है, उस आरक्षित क्षेत्र में उसी वर्ग के सदस्य रह सकते है। जैसे सरकारी भर्तियों में SC ST को विशेष महत्त्व देना। लेकिन इसकी वजह से अनारक्षित वर्ग के सदस्यों को योग्य होते हुए भी सुविधा से वंचित कर दिया जाता है। भारतीय संविधान में आरक्षण व्यवस्था की गई है, और आरक्षण का लाभ उठाने वाला वर्ग आरक्षण व्यवस्था को हमेशा सपोर्ट करता है, जबकि वंचित वर्ग का मानना है की जब गरीबी जाति देख कर नही आती तो आरक्षण की व्यवस्था जातिगत क्यों है। बात ये भी सही है, आरक्षित वर्ग में अमीर लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे है जबकि सामान्य श्रेणी के गरीब लोग भी उस विशेष लाभ से वंचित रह जाते हैं, जो की वास्तव में भारत के लिए चिंता का विषय है।
आरक्षण व्यवस्था को इस तरह से समझ लेते है की अगर दो लड़के, एक SC/St का है और दूसरा सामान्य श्रेणी का है, दोनों में समान योग्यता है तो भी sc वाले को प्राथमिकता मिलेगी. क्योंकि जितने प्रतिशत उनको आरक्षण मिला है वो स्थान भी तो भरना है ना. आरक्षण का विरोध करने वालों का मानना है की इसी वजह से प्रशासन में धीरे धीरे योग्य और भ्रष्ट लोगो की तादाद बढ़ रही है. और आये दिन हजारो सामान्य श्रेणी के होनहार छात्रों के सापने टूटते है. जो की वास्तव में चिंता का विषय है.

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आरक्षण व्यवस्था के प्रकार – Types of Reservation System in India

Reservation System in India : भारत में शैक्षिक संस्थानों और दुसरे आरक्षित वर्गों में अलग अलग मापदंडो के आधार पर आरक्षण व्यवस्था की गई है, जिसमे आरक्षित स्थान में उस वर्ग विशेष को एक निश्चित अनुपात में कोटा दिया जाता है जिसमे उसे वर्ग के लोग आ सकते है. जो लोग उस कोटे के अंतर्गत नहीं आते है वो बाकी के शेष बचे अनुपात में प्रतिस्पर्धा करते है. मान लीजिये किसी वर्ग को कहीं पर 20% आरक्षण मिला हुआ है तो सामान्य वर्ग को पीछे बचे हुए 80% में संघर्ष करना पड़ता है.

जातिगत आधार – caste base

Reservation System in India : केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा व्यक्ति की जाती के आधार पर जो आरक्षण दिया जाता है उसे जातिगत आरक्षण कहते है. जातिगत आरक्षण का देश में सबसे ज्यादा विरोध किया जाता है. क्योंकि जातिगत आरक्षण मिलना सिर्फ इस बात पर निर्भर करता की आप किस जाती में पैदा हुए, उदहारण के लिए अगर आप राजपूत या ब्राह्मण के के रूप में पैदा हो गए तो चाहे आप कितने भी गरीब हो आपको आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिलेगा. वहीँ अगर अनुसुचित जाती या जनजाति में पैदा हुए तो चाहे आपके आर्थिक हालत चाहे जितने अच्छे हो आपको स्वत: ही आरक्षण का लाभ मिल जायेगा. इसलिए जातिगत आरक्षण का देश भर में विरोध किया जाता है, लेकिन कुछ राजनेता वोटो के लालच में जातिगत आरक्षण का बचाव करते रहते है.

Central Government द्वारा funded higher education institutions में उपलब्ध सीटों में से 22.5% SC(दलित) और ST(आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (SC के लिए 15%, ST के लिए 7.5%). OBC के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह 49.5% तक बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा, SC/ST के विद्यार्थियों के लिए केवल 50% अंक ग्रहणीय हैं. यहां तक कि संसद और सभी चुनावों में यह अनुपात लागू होता है, जहां कुछ समुदायों के लोगों के लिए चुनाव क्षेत्र निश्चित किये गये हैं. तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में आरक्षण का प्रतिशत SC के लिए 18% और ST के लिए 1% है, जो स्थानीय जनसांख्यिकी पर आधारित है।

आंध्र प्रदेश में, शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में BC के लिए 25%, SC के लिए 15%, ST के लिए 6% और मुसलमानों(अल्पसंख्यक) के लिए 4% का आरक्षण रखा गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में सीटें 14% SC और 8% ST के लिए आरक्षित हैं।

धार्मिक आधार पर आरक्षण – Reservation on religious grounds

देश के कई राज्यों में धर्म के आधार पर भी आरक्षण दिया जाता है. जैसे तमिलनाड़ु में मुसलमानों और ईसाईयों को प्रत्येक को 3.5% सीटें आरक्षित कर रखी है, जिसके परिणामस्वरूप अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 30% से 23% करना पड़ा है. वहीँ पर मुसलमान और ईसाईयों को अन्य पिछड़ा वर्ग से हटा दिया गया है. वहीँ अगर बात दुसरे राज्यों कि की जाये तो आंध्र प्रदेश में 4% आरक्षण मुसलमानों को दे रखा है जिसे उच्चतम न्यायलय में चुनौती दी गई है. वहीँ केरल लोक सेवा आयोग ने भी मुसलमानों को 12% आरक्षण देने का मत रखा तो उसे भी कोर्ट में चुनौती दी गई है. इसके अलावा केंद्र सरकार भी मुसलमानों के कई वर्गों को धार्मिक आधार पर कई तरह से आरक्षण का लाभ दे रही है.
अब फिर वही सवाल खड़ा होता है की देश में कही मुसलमान अल्पसंख्यक है तो कहीं बहुसंख्यक है, ऐसे में धार्मिक आधार पर आरक्षण देना कहाँ तक उचित है. अगर गरीबी धर्म देख कर नहीं आती तो आरक्षण धर्म और जाती देख कर क्यों दिया जाता है. ऐसा तो नहीं हो सकता की किसी समुदाय विशेष के लोग ज्यादा होनहार है, या जिनका देश के विकास में कोई विशेष योगदान है.

लिंग के आधार पर आरक्षण – Reservation on the basis of gender

हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चत करने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा विभिन्न क्षेत्र में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है. जैसे की पंचायत चुनावों और नगर निगम चुनावो में माहिलाओ को 33% आरक्षण प्राप्त है. जिसे संसद और विधानसभा तक बढाने की योजना है, भारत के कई लॉ कॉलेज में माहिलाओ को 30% तक आरक्षण प्राप्त है महिला आरक्षण विधेयक 09th मार्च 2010 को 186 सदस्यों के बहुमत से पारित हुआ था. कॉलेज और स्कूलों में प्राप्त आरक्षण पर कुछ पुरुषों का मानना है की ए उनके साथ भेदभाव है. ऐसा नहीं होना चाहिए था.

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प्रबंधन कोटा – management quota

प्रबंधन कोटा में किसी जाती या धर्म के आधार पर आरक्षण ना होकर आर्थिक स्थिति के आधार पर आधारित है. कहने का मतलब है की आप पैसे देकर अपने लिए सीट खरीद भी सकते है. इसलिए जातिगत आरक्षण के समर्थक लोग प्रबंधन कोटा के धूर विरोधी है. प्रबंधन कोटा में प्राइवेट कॉलेज संचालक अपने मनमुताबिक विद्यार्थियों के लिए 15% तक आरक्षण दिया जा सकता है. इसलिए इसका सबसे ज्यादा विरोध किया जाता है. उनका कहा जाता है की ये आरक्षण का सबसे विकृत रूप है. इसलिए सरकार को प्रबंधन कोटा पद्धति पर एक बार फिर से गौर किया जाना चाहिए.

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अधिवासित राज्य – domicile state

अधिवास का मतलब उन लोगो से है जो एक जगह से चल कर दुसरी जगह या राज्य में निवास करते है, जैसे मान लीजिये कोई व्यक्ति नौकरी, विस्थापन आदि कारणों से एक राज्य को छोड़ कर दुसरे राज्य में रहने लगता है तो उसे भी सरकार के द्वारा आरक्षण का लाभ दिया जाता है. जैसे की PEC चंडीगढ़ में पहले चंडीगढ़ के निवासियों के लिए 83% सीटें आरक्षित थी, जिन्हें बाद में 50% कर दिया था.

पूर्व स्नातक महाविद्यालय – undergraduate college

कई शिक्षण संस्थानों में undergraduate विद्यार्थियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती है, JIPMER जैसे संस्थानों में undergraduate seat के लिए आरक्षण की नीति उनके लिए है, जिन्होंने JIPMER से MBBS पूरा किया है. AIIMS में इसके 120 graduate seat में से 33% सीट 40 undergraduate seat के लिए आरक्षित हुआ करती हैं. हालाँकि कोर्ट के द्वारा इसे अवैध करार दिया गया है. ये तो आरक्षण के सामान्य प्रकार हो गए जिनके आधार पर देश में आरक्षण का वितरण किया गया है अब कई अन्य मापदंडो के आधार पर बात कर लेते है.

दुसरे मापदंड – second parameter

आरक्षण के उपरोक्त मापदंडो के अलावा भी कई सारे दुसरे मापदंड होते है –

स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजो  के लिए.

भारत की आजादी की जंग में सहयोग करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजो के लिए विशेष मापदंड के तहत व्यवस्था की गई है.

विकलांगो के लिए.

शारीरिक रूप से असहाय लोग जो आरक्षण के लिए पात्र है, के लिए विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में व्यवस्था की गई है. जैसे सरकारी नौकरियों में अलग से आरक्षण की व्यवस्था करना.

खिलाडियों के लिए.

कई भारतियों में राष्ट्रिय स्तर पर तो कई भर्तियों में राज्य स्तर के खिलाडियों को खेल कोटा के तहत भर्ती किया जाता है जो की आरक्षण के अंतर्गत ही आता है. जिसका उद्देश्य खेल कूद को बढ़ावा देना है.

अनिवासी भारतीयों (एनआरआई (NRI)) के लिए

शैक्षिक संस्थानों में  (NRI) के लिए छोटे पैमाने पर सीटें आरक्षित होती हैं। उन्हें अधिक शुल्क और विदेशी मुद्रा में भुगतान करना पड़ता है (नोट: 2003 में एनआरआई आरक्षण आईआईटी से हटा लिया गया था).

किसी संगठन के उम्मीदवार को.

भारत में कई बार आरक्षण किसी संगठन विशेष के उम्मीदवार के आधार पर भी दिया जा सकता है, हालाँकि ए विषय विवादास्पद है.

सेवानिवृत सैनिको के लिए.

सेना में नौकरी करके सेवानिवृत होने वाले सिपाहियों को भी विशेष आरक्षण दिया जाता है. क्योंकि उनके पास फ़ौज की नौकरी का तजुर्बा और अनुशासन होता है.

शहीदों के परिवारजनों को .

देश के लिए अपना सर्वस्व नयौछावर करने वाले शहीद सैनिको के वंशजो को सरकार की तरफ से नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की जाती है.

विदेश से लौटने वाले भारतियों के लिए.

जो भारतीय मूल के लोग विदेशो में रह रहे है और वो वापस भारत आकर बास जाते है तो उन्हें सरकारी नौकरियों में निश्चित अनुपात में आरक्षण दिया जाता है.

जिनके माता पिता ने अंतरजातीय विवाह किया हो.

समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर समाज का तिरष्कार सहना पड़ता है, इसलिए सरकार के द्वारा अंतरजातीय विवाह करने पर आरक्षण और कुछ धनराशी का प्रावधान किया गया है.

सेना स्कूलों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में छूट

सेना स्कूलों(Army Schools), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के स्कूलों आदि में उनके कर्मचारियों के बच्चों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है.

पूजा स्थलों के लिए किराये में छूट की व्यवस्था.

विभिन्न पूजा स्थलों जैसे जैसे तिरूपति (बालाजी) मंदिर, तिरुथानी मुरुगन (बालाजी) मंदिर आदि में आने जाने के लिए किराया, वाहन की व्यवस्था आदि में आरक्षण की अलग से व्यवस्था की गई है. ताकी गरीब व्यक्ति भी दर्शन कर पाए.

वरिष्ठ जनों और PH के लिए .

देश में वरिष्ठ जनो के लिए हर जगह आरक्षण की व्यवस्था है जैसे की बस या रेलवे में किराये में आरक्षण. कई धार्मिक या सांस्कृतिक स्थलों पर आरक्षण आदि.

सरकारी भर्ती के लिए जाने वाले उम्मीदवारों के लिए किराये में छूट.

सरकारी भर्तीयों में जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए किराये में छूट के रूप में भी आरक्षण प्राप्त होता है. हालाँकि कई भर्तियों में ये छूट जातिगत आरक्षण के आधार पर तो कहीं पर सामान्य रूप से मिलता है.

आरक्षण के फायदे – Benefits of reservation

Reservation System in India : आरक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी विशेष वर्ग को विशेष सुविधा देना होता है ताकी उस वर्ग का सर्वांगीण विकास हो पाए. इसलिए दबे हुए और हाशिये पर रहने वाले समूहों को जब आरक्षण मिलता है तो प्रशासन में स्वत: ही उनकी भागीदारी बढ़ जाती अहि. जिससे उस वर्ग का विकास होता है. जैसे की आजादी के पहले अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाति के लोगो को समाज में कम भागीदारी दी जाती थी. इस कारण ये वर्ग ज्यादा प्रताड़ित थे, जिसके निवारण के लिए इन समाज के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई और आज ए दोनों वर्ग भारतीय समाज में बराबर भागीदारी निभा रहे है. इसी तरह से औरते भी प्रताड़ित थी, जिन्हें प्रशासन में भागीदारी नहीं दी जाती थी लेकिन आज आरक्षण के बदौलत इन्होने हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करके अपना लौह मनवाया है.
एक तरह से देखा जाये तो आरक्षण का मुख्य उद्देश्य पिछड़े और हाशिये पर रहने वले लोगो को सहायता या निश्चित भागीदारी प्रदान करना है. जो की उस वर्ग के लिए अति महत्वपूर्ण साबित होता है.

आरक्षण के नुकसान – disadvantages of reservation

Reservation System in India : वैसे तो आरक्षण की व्यवस्था देश में पिछड़े वर्गों की के उद्धार के लिए की गई है, लेकिन किसी चीज के चाहे जितने भी फायेदे हो. कोई न कोई नुकसान तो जरुर होते है, वैसे ही देश में आज आरक्षण के कई सरे नुक्सान सामने आ रहे है और इसी वजह से कुछ लोग आरक्षण का विरोध कर रहे है. जैसे की-

प्रशासन में अयोग्य लोगो के आने का डर

आरक्षण की व्यवस्था होने से जितने प्रतिशत आरक्षण जिस जाती को मिला है, उतने प्रतिशत अभ्यर्थी उस जाती से पास करने अनिवार्य होते है चाहे वो योग्य हो या अयोग्य. इसी वजह से कई भर्तियो में अनुसूचित जाती और जनजाति की मेरिट इतनी कम कर दी जाती है की सभी अयोग्य लोग भी ज्वाइन कर लेते है, और ए चीज देश के लिए अत्यंत खतरनाक है.

जातिवाद को बढ़ावा

आरक्षण की व्यवस्था का सबसे बड़ा नुक्सान ये है की आरक्षण का आधार आर्थिक हालात ना होकर जातिगत है, जिससे देश में जातिवाद को अत्यधिक बढ़ावा दिया जा रहा है, देश में कई राजनैतिक दल और कई संगठन अनुसूचित जाती और जनजाति के लोगो को सामान्य वर्ग के लोगो के खिलाफ भड़काकर दंगे करवाते है. जिससे जातिवाद बढ़ता है और महौल खराब होता है. अगर आरक्षण की व्यवस्था ना होती तो जातिवाद पर बहुत हद तक अंकुश लगाया जा सकता था. क्योंकि चुनावो के समय नेता लोग अनुसूचित जाती और जनजाति के लोगो को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते है.

विशेष
  1. देश में सबसे ज्यादा विरोध जातिगत आरक्षण का होता है. क्योंकि विरोध करने वाले लोगो का कहना है की जब गरीबी जाती देख कर नहीं आती है, तो आरक्षण जाती देख कर क्यों दिया जाता है.
  2. आरक्षण में चयनित जातियों को विशेषाधिकार होने से बाकि जातियों पर अक्सर झूठे मुकदमे के मामले आते रहते ही.
  3. कुछ विद्वानों के अनुसार आरक्षण देश के लिए हानिकारक है.
  4. आरक्षण से देश के आरक्षित वर्ग में कर्महीनता का भाव आता है, क्योंकि आरक्षण होने के कारण कम नंबर वालों का भी चयन हो जाता है.

खैर आपको ए आर्टिकल कैसा लगा है हमें ट्विटर पर जरुर बताये धन्यवाद.

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